Synopsis– स्वामी शिवानंद सरस्वती, आध्यात्मिक जगत में एक ऐसा नाम है जो नाम में स्वतंत्र राशनी,और आध्यात्मिक जगत में ऊर्जा आजाता है। उनकी जीवन से स्पष्ट होता है कि कैसे वे एक साधारण व्यक्ति से असाधारण यात्री बने। एक बड़ी वात है वे सुरुआत से एक चिकित्सक थे। लेकिन संसार के दुख -दर्ज देखकर उन्होंने आध्यात्मिक मार्ग को चुन लिए है। उन्होंने अनत ध्यान, की रूख किया और कठिन साधना से सिद्ध है, ”मानसिक शक्ति ” इससे पहले अध्याय की पंक्ति है; रूप और दर्शन ,उनकी विचार शक्ति हम यहां बहुमुल्य चर्चाएँ प्रकाशित करते हैं।
Writter.Ugrasen Behera.
Asst.Tr.PGHSS NUADIHI,DIST-DEOGARH
Digital writer, script writer
Swami Shibanand life.
स्वामी शिवानंद एक प्रसिद्ध भरतीय आध्यात्मिक गुरु। योग प्रशिक्षक और समाज सुधारक हैं। जिन्हें उनकी सादगीपूर्ण जीवनशैली, अनुशासन और मानवता की आजीवन सेवा के लिए व्यपक रूप से सन्मानित किया जाता है। उनका जन्म 8 अगस्त 1896 को सिलहट ( वर्तमान बांग्लादेश ) में हुआ था और उनका प्रारंभिक जीवन कठिनाइयों से भरा था। भीषण अकाल के दौरान कम उम्र में ही अनाथ हो जाने के बाद,उन्होंने गरीब और संघर्ष का सामना करते हुए अपना बचपन बिताया,इन अनुभवों ने उनके भीतर दुशरों के प्रति गहरी करुणा का भाव विकसित किया।

स्वामी शिवानंन्द ने अपना जीवन आध्यात्मिकता, आत्मसंयम और सेवा के लिए समर्पित कर दिया। वे योग, ध्यान और ब्रह्मचर्य के निष्ठावान अनुयायी बन गए, क्योंकि उनका मानना था कि ये अभ्यास शारीरिक स्वास्थ्य,मानसिक शांती की नींव हैं।
वृद्धावस्था में भी वे अपनी कठोर दिनचर्या के लिए जाने जाते हैं, जिसमें योग ,सादा शाकाहारी भोजन और नियमित आध्यात्मिक अभ्यास शामिल हैं।
उन्होंने अनेक वर्ष गरबों बीमारों और आमज के हाशिए पर रहने वाले लोगों , विशेषकर कुष्ठ रोगियों की सवा में व्यतीत किए,बिना किसी प्रशंसा में। उनकी विनम्रता उनके जीवन शैली में झलकती है- वे न्यूनतम सामग्रियों के साथ रहते हैं और अनुशासन , आदर समाज सेवा जैसे मुल्यों को सर्वोपरि मानते हैं।
2022 में, स्वामी शिवानंद को सामाजिक सवा में उनके असाधारण योगदान के लिए भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कारों में से एक पद्म श्री से संम्मानित किया गया। उन्हें सादगी,दीर्घायु और आध्यत्मिक ज्ञान के प्रतीक के रूप में व्यापक रूप से सराहा जाता है,जो विधियों से लोगों को संतुलन सेवा और आंतरिक शांति का जीवन जीने के लिए प्रेरित करते हैं।
Swami Shibananda Education life.
स्वामी शिवानंद का शैक्षिक जीवन सरल और अनुशासित था, जिस पर औपचारिक शिक्षा की अपेक्षा आध्यत्मिक ज्ञान का अधिक प्रभाव था। एक गरीब परिवार में जन्मे स्वामी शिवानंद को आधुनिक अथों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर नहीं मिला। कम उम्र से ही उनका झुकाव आध्यात्मिक, आत्मा-अध्ययन और सेवा की ओर था।
उन्होंने आध्यत्मिक गुरूओं और सातों के मार्गदर्शन में धार्मिक ग्रन्थों, योग, ध्यान और नैतिक मूल्यों का अध्ययन किया ।उनकी शिक्षा का केंद्र बिंदु डिग्रीयों के बजाय आत्म-संयम,करूण और आंतरिक अनुशसान था। जीवन भर के अध्ययन, अवलोकन और आध्यात्मिक अभ्यास के माध्यम से स्वामी शिवानंद ने ज्ञान,विनम्रता और स्वस्थ जीवन, सत्य और मानवता की सेवा के दर्शन को विकसित किया।
Thought of Swami Shivanand’s

#विचार आलोक गति से भी तेज से चलते हैं।
” ईथर” एक विद्युत धारा का माध्यम है, ईथर अत्यंत सूक्ष्म तत्व माना जाता है। लेकिन विचार उससे भी अधिक सूक्ष्म है। इसका सबसे बड़ा प्रमाण रेडियीं है। कोलकता में जब कोई गायक मधुर संगत रचा रहा होता है, तो आप दिल्ली में अपनी घर बैठे उसे सुन सकते हैं। वायरलेस के माध्यम से आपको सभी समाचार मिल जाते हैं।
इस प्रकार आपका मन एक वायरलेस मशीन की तरह है, एक संत, जिसका हृदय शांत,संतुलन और समाधान के विचारों को पुरी दुनिया के साथ साझा कर सकता है।यह विचार बिजली के प्रवाह से भी तेज करता है और वहां भी शांति और समाधान के समान विचार उत्पन्न करता है।इसके विपरीत ,एक सांसारिक व्यक्ति ,जिसका मन ईर्ष्या, घृणा और प्रतिशोध से भरा होता, वही विचार जो कलह और बुरे विचारों को प्रेरित करते हैं, लाखों लोंग के मन में प्रवेश करते हैं, और वैसे ही घृणा और कलहपुर्ण विचार उत्पन्न करते हैं।
#फैसले का बहाना।
यदि आप किसी झील या तालाब के पानी में पत्थर फेंकते हैं,तो उससे लहरें उत्पन्न होती हैं। ये लहरों चारों और फैलती हैं और तालाब तक भी पहुँच जाती हैं। इसी प्रकार ,जब किसी व्यक्ति के हृदय के हृदय में कोई विचार, अच्छा या बुरा,उत्पन्न करता है, जो दूर-दूर तक फैलती हैं। जब कोई विचार एक हॄदय से दूसरे हॄदय तक जाती हैं, तो उसका वहां और मध्यम क्या होती है? इसका सही उत्तर यह हो सकता है कि यहाँ भी, वही मन वायु में फैलता है और उस विचार के लिए एक समान वाहन उत्पन्न होता है। जिस प्रकार आत्मा भावनाओं की है, और वायु और ध्वनि की भी वाहक है।
#न्याय स्वर्ग में सुरक्षित है
आप अपनी विचारों की शक्ति से पुरी दुनिया को हिला सकते हैं। विचारों में अपार शक्ति होती है।ये एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक फैल सकते हैं। प्राचीन काल के महान ऋषियों और योगीयों के शक्तिशाली विचार आज भी आकाश में संरक्षित हैं।
जिन योगियों को अज्ञात वस्तुओं को देखने की आंतरिक शक्ति प्राप्त हो जाती है,वे उस विचार के प्रतिबिंब को देखते हुए भी पढ़ सकते हैं।
आप चारों ओर विचारों का अथाह सागर फैल हुआ है। आप कुछ विचारों को दुनिया को वापस लौटा रहे हैं। हर किसी की अपनी-अपनी विचारों की दुनिया होति है।
#निर्णय एक सजीव पदार्थ है।
विचार एक सजीव प्राणी कोई भी विचार पथर से भी ज्यादा मजबूत होता है।संसार में कुछ भी समाप्त नही है,लेकिन विचार कभी समाप्त हो नही सकता।
हर कंपनशील अवस्था में परिवर्तन के साथ ,उसके मूल मन में उत्पन्न होता है। विचार ऐसा एक शक्ति सारी जगह पे कुछ भी करते है। इसलिए मन में एक सुक्ष्म तत्व की आवश्यकता होती है।
विचार जितना गाढ़ होगा।उसका प्रभाव उतनी ही तेजी से प्रकट होगा। हम अपने विचारों को जितनी सही दिशा में केंद्रित करेंगे,अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में उतनी ही अधिक सफलता मीलेगी।
#जीवन का निर्णय
विचार एक सूक्ष्म शक्ति है। यह हमारे भोजन के साथ उत्पन्न होता है। छंदायोंपनिषेद में उदलक और श्वेतकेतु की कहानियों के माध्यम से इसका स्पष्ट उल्लेख किया गया है।
यदि भोजन शुद्ध और पवित्र है, तो विचार भी शुद्ध और पवित्र होगा। जिनका विचार शुद्ध होते हैं। उनकी वाणी भी तेजस्वी और प्रकाशमान होती है। और उसका श्रोता पर गहरा प्रभाव पड़ता है।वे अपनी शुद्ध बुद्ध से लोगों को प्रभावित कर सकते हैं। यहाँ तक सूक्ष्म मंड जैसे सबसे कठिन विचारों से भी, केवल शुद्ध विचार ही उत्पन्न करने चाहिए । विचार संस्कृति एक पवित्र और ज्ञानवान वृक्ष है।
#विचार कंपन का चमत्कार
हमारे हॄदय में उठने वाले प्रत्येक विचार का अपना एक कंपन होता है, जो शाश्वत और कभी न समाप्त होने वाला होता है, यहाँ तक कि तूफान के बीच भी। यह ब्रह्माण्ड की प्रत्येक वस्तु की क्षण-क्षण कंपन कर रहता है, और यदि हमारा दिन अच्छा,पवित्र और प्रभावी ही, तो प्रत्येक विचार हमारी आत्मा में कंपन उत्पन्न करेगा।
जो लोग हमारे विचारों का अनुसरण करते है वे अनजाने में उन विचारों को स्वीकार कर लेते हैं, जिन्हें मैनें स्वयं अपने बल से प्रचारित किया है। परिणामस्वरूप में संघर्ष की मेहनत से अनभिज्ञ होकर असंख्य विचारों को प्रभाहित होने देता हूँ। और ये सभी मिलकर एक निन्म और घटिया गुणवत्ता का निर्माण करते हैं, जिसे उम्मीदवारों और बुरे लोगों ने उत्पन्न किया है।
#तरंगों की विविधता
प्रत्येक मनुष्य का अपना दिमाग होता है, अपने विचार होते हैं, चीजों को समझने का अपना तरीका होता है और काम करने का अपना तरीका होता है।
जिस प्रकार चेहरे की बनावट के अनुसार आवाज बदलती है, उसी प्रकार समझने और सोचने का तरीका भी हर व्यक्ति में अलग -अलग होता है। इसलिए गलतफहमी के कारण मतभेद और असहमत उत्पन्न होती है।
एक व्यक्ति दसरे का दृष्टिकोण को ठीक से नहीं समझ पाता । इसी कारण करीब लोगों के बीच भी मतभेद जैसे स्तिस्थि उत्पन्न होता जाता है। कई समस्याओं के कारण दोस्ती लंबे समय तक नहीं रहा पाती। हर व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति की मानसिक उर्जा या उसके गुणों को समझने का प्रयास करना चाहिए। इसमें व्यक्ति अदृश्य और अनदेखा चीजें मन को सुरक्षित रखती हैं। स्मृति को नष्ट करती हैं और मन में एकांत की स्थिति पैदा करती हैं।
