भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में क्रांतिकारी नेताओं में से एक महान नायकों में से एक नेताजी सुभाष बोस थे। उन्होंने हर भारतीयों जुवा के मन में जो क्रांतिकारी जागृति पैदा की, इसीलिए वह जुगजुग के लिए अमर हो गये। इस क्रांतिकारी ने भारतीय जनता के मन में जो जश जगाया, उसने पूरी दुनिया को चकित कर दिया। वे अपना जीवन एक सैनिक के रूप में व्यतीत करना चाहते थे। उनके हर कार्य ने दुनिया में मिसाल कायम की।
आइए उस महान नायक के जीवन के बारे में कुछ जानें।
Subhas Chandra Bose Birth- Blog by- U .Behera
जानकारी 1893 ओडिशा का कटक जिला में नेताजी सुभाष चंद्र बस हुआ था। उनके पिता जानकीनाथ बोस स्वतंत्रता के प्रबल समर्थक थे। नेताजी आपने पिता से बहुत प्रभावित थे। स्कूल शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने कलकता के प्रेसिडेन्सी कलेज में अध्ययन किया। वहाँ वे अपनि प्रतिभा और व्यक्तित्व के कारण सबका ध्यान अकर्षित करने लगे। शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने भरतीय सिविल सेवा परीक्षा सफलतापिर्वक उत्त्तीर्ण की ,लेकिन सरकारी नैकरी करने के बजाय उन्होंने अपना जीवन स्वतंत्रता के महान बलिदान के लिए समरर्पित कर दिया।
उन्होंने किसी विदेशी सरकार का गुलाम बनने के बजाय मातृभूमि की सेवा को पूण्य माना और वे स्वतंत्रता आंदोलन के नेता बन गए।
Netaji or freedom fight
स्वतंत्रता संग्राम में दो दलों की विचारधारा इसे लागू किया जा रहा था। एक समूह उदारवादी था, जबकि दूसरे चरमपंथिथी । चरमपंथी रक्तपात के माध्यम से स्वतंत्रता प्राप्त करना चाहते थे और उनके शब्दों में , वे क्रांति के माध्यम से स्वतंत्रता प्राप्त करना चाहते थे। उन्होंने जातीय कॉंग्रेस के अध्यक्ष के रूप में पदभार संभाला और क्रांति के माध्यम से स्वतंत्रता प्राप्त करना चाहते थे। कोंग्रेस नेताओं की स्वार्थ सोच से नफ़रत थी।
इसलिए वे चरमपंथी दालों में शामिल होने के लिए विवश हुए। उन्होंने फँरवर्ड ब्लॉक की स्थापना कि और स्वतंत्रता संग्राम जारी रखा। परिणामस्वरूप, ब्रिटिश सरकार का क्रोध उन पर टूट पड़ा।” मुझे खून दो ,में तुम्हे आजादी दूंगा,” सुभाष के इन शब्दों ने ब्रिटिश सरकार को भयभीत कर दिया। परिणामस्वरूप, उन्हें कारावास में डाल दिया गया।
नेताजी की गतिविधियों को देखते हुए इंग्रेजो पुलिस और कड़ी नजर रखे रही है। लेकिन सभी को धराशायी करते हुए वे अफगानिस्तान के रास्ते रूस चले गए। बीएड में वे जर्मनी में उन्हें हिटलर से मदद मिली। जन्होंने भरतीय सैनिकों के साथ ” आजाद हिंदू फैज” का गठन किया। उन्होंने जापान से अपनी सेना के साथ दिल्ली की ओर विजय यात्रा शुरू की। उनके मुख से ” चल्लो दिल्ली ” के जोशीले शब्द निकले। लेकिन उनका सपान साकार नहीं हुआ। भाग्यदेबी उनका साथ नहीं थे।
सुभाष जब जहाज से आ रहे थे, तभी उनकी अचानक लापता होने की अफवाह चारों ओर फैल गई। सभी चकित हो गए ।इसी वजह से उनकी मृत्यु आज भी एक रहस्य बनी हुई है। वे राजनीति से बहुत दूर रहे और स्वयं को स्वतंत्रता के लिए समर्पित कर दिया।
Netaji’s Ideology
विवेकानंद की आध्यत्मिकता क्रांति ने उन्हें प्रेरित किया और उन्हें कोई तरह से प्रभावित किया। कवि रवींद्रनाथ टैगोर ने सुभाष को हर पल मानसिक सहारा दिया। उथल-पुथल भरी राजनीति परिस्थितियों में, देशबंधु चित्तरंजन से प्रेरणा थे। उसके वाद भी कर्तव्य के मार्ग पर अग्रसर इन सब के बवजूद, जन्होंने अपनी खुद की विचारधारा विकसित करके दूसरों को काफी हद तक प्रेरित करना जारी रखा।
Conclusion
आज नेताजी सुभाष की मृत्य का रहस्य सुलझ गया है। उन्मोचित की पहचान नहीं हो पाई है। उनकी अनुमनिक मृत्यु के कई वर्षों बाद ,भारत सरकार ने उन्हें भारत रत्न से सम्मानित करके उनका ऋण चुकाबा, बल्कि उनके प्रत्येक भारतीय उनके महान बलिदान को नमन करता है। वे संपूर्ण अड़ीया राष्ट्र का गौरव और सम्मान हैं। उसी वीर पुरूष का महान बलीदान हर स्वतंत्र विचारक को सदा प्रेरित करता रहेगा।
Joy HIND
