What is Rasgulla called in English?

What is Rasgulla called in English?

रसगुल्ला बारे में सब को पता हैं। ये रसगुल्ला छेना और सूजी से बना एक नरम,कमल भारतीय पारम्परिक मिठाई है।जिसे चाशनी में पकाया जाता है। यह पारंपरिक मिठाई जो ओडिशा की जगन्नाथ मंन्दिर में प्रसाद होता है। इसके साथ ओडिशा और बंगाल में लोकप्रिय है और अब दुनिया भर में बहिन बहुत पसंद की जाती है। अंग्रेजी में इसगुल्ला को “छेना बल में चीनी का सिरुप” ( cheese ball in sugar syrup) कहा जाता है।रसगुल्ला में बारे में और कुछ जानने के लिए पढ़ते रहें।

Rasgulla in English

अंग्रेजी में इसको कहा जाता है, “चाशनी में भरी पनीर गोलियां” । इसे ताजा छेना के गोलों को चीनी की चाशनी में दाल कर उबालकर तैयार किया जाता है। जब तक कि वे हलके,रसदार और फुल्का न हो जाएं। परिणामस्वरूप मुंह में गुस जाने वाली एक ऐसी मिठाई तैयार जिस में मिठाई और कोमलता का बेहतरीन संतुलन होता है।

History of Rasgulla

रसगुल्ला का इतिहास एक रोचक मुद पर है। क्योंकि ओडिशा और पश्चिम बंगाल दोनों ही रसगुल्ले आविष्कार का दावा करते हैं। इसी वजह से यह भारत की सबसे मशहूर मिठायों में से एक बन गई है। लेकिन पैराणिक तथ्य के अनुसार रसगुल्ला जगन्नाथ मंदिर में प्रासाद लगता है। जगन्नाथ संस्कृति बहुती पुरानी है, ओर उस समय से ही भगवान को पास रसगुल्ला प्रसाद चढ़ाया जाता रहा है।इसलिए रसगोला कि सुरुआत ओडिशा से हुई होगी।

ओडिशा के पहले रसगुल्ले और बंगाल के बांग्लार रसगुल्ले दिनों को भौगोलिक संकेत (GI TAG) मिला हैं। जो इसके गहरे संस्कृतिक महत्व को साबित करता है।

Rosgulla recipe.

रसगुल्ला जिसे स्पंजी चाशनी में भीगे हुए पनीर के गोले भी कहा जाता है। ताजा छेना को तैयार करके ,उसे चिकने गोल्लों का आकार देकर और फिर उन्हें चीनी की उबलते पानी में तब। तक पकाया जाता है, जब तक वह नरम और रसादार न हो जाएं।

रसगुल्ला बनाने का प्रणाली

प्रणाली 1- रसगुल्ला बनाने की शुरुआत के लिए, दूध उबालें और उसमें नींबू का रस या सिरका डालकर मिलाबट करलें। दूध के ठोस भाग को मालमल के कपड़े में छान लें,और खट्टापन दूर करने के लिए पानी से धो लें। इसे लगभग 30 मिनिट के लिए लटका दें ताकि नरम छेना बन जाए। यही रसगुल्ले बनाने का आधार है।

प्रणाली 2- छेना लें और हथेली से तब तक गूंधें जब तक वह चिकना और नरम नहीं है।नरम होने का वाद मिश्रण बंधने के लिए थोड़ा सूजी मिला सकते हैं। छेना और सूजी मिश्रण को छोटी छोटी गोला या आपका मर्जी अनुसार गोला बना लें।

प्रणाली 3- इसके बाद चीनी की चाशनी बनाना

एक गहरे बर्तन में पर्याप्त पानी के साथ चीनी उबालें। रसगुल्ले की चाशनी हल्के होने चाहिए, बहुत गढ़ी नहीं। इससे रसगुल्ले पकते समय फूलते हैं। फूलने बाद मिठाई की सोख लेते हैं।

प्रणाली 4- ठंडी होने के बाद खाने के लिए तैयार होजाएगें

रसगुल्ला के बरे में रोचक तथ्य।

1- उत्पन्न विवाद- रसगुल्ला पर बंगाल और ओडिशा के विच अपना अपना दावा करते हैं। यह इसे केवल एक मिठाई ही नहीं बल्कि दोनों राज्यों के लिए गौरव और विरासत का विषय भी बनाता है।

2- जीआई टैग( GI TAG) भौगालिक संकेत का दर्जा / ओडिशा और बंगाल दोनों राज्यों में अपनी-अपनी मिठाईयों के लिए भौगोलिक संकेत ( जीआई ) की मान्यता प्राप्त है। इसमे मिठाई की प्रामाणिकता सुनिश्चित होती है और इसकी संस्कृति पहचान की रक्षा होती है।

3- ओडिशा की जगन्नाथपुरी मंदिर में रोसगुल्ल प्रसाद होता हैं।

4आनोखी बनावट- रसगुल्ला अपनी नरम, स्पंजी और रसदार बनावट के लिए जाना जाता है।इसकी यह खासियत ताजे छेना के गोलों को चीनी की चाशनी में सही समय तक उबालने से आती है।

शेष कथा

रसगोला का नरम और मीठा स्वाद अनोख होता है। इसे हर कोई खाना पसंद करता है। बाजार में इसकी डीमांड बहुत ज्यादा है। इसलिए कहा जाता है की रोसगुल्ल भरतीय मिठाईयों में खास है।

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